चोट के कारण वानिंदु हसरंगा बाहर, फिर भी श्रीलंका का पलड़ा भारी—हरारे स्पोर्ट्स क्लब में अगस्त के आखिरी हफ्ते में होने वाली दो वनडे की सीरीज ने शुरू होने से पहले ही टोन सेट कर दिया है। 29 और 31 अगस्त 2025 को होने वाले मैचों में मेजबान जिम्बाब्वे कप्तान क्रेग एर्विन की अगुआई में घरेलू परिस्थितियों का फायदा उठाना चाहेगा, जबकि श्रीलंका बेहतर रैंकिंग और हालिया फॉर्म के दम पर जीत की दावेदारी पेश करेगा। यह छोटी सीरीज भले हो, लेकिन चयन संयोजन, खिलाड़ियों की वापसी और रणनीतिक सूक्ष्मताओं की वजह से दिलचस्प रहने वाली है।
सबसे बड़ी खबर—हसरंगा नहीं खेलेंगे। हैमस्ट्रिंग से जुड़ी चिंताओं के चलते श्रीलंका को अपने स्टार ऑलराउंडर की ऊर्जा, तेज फील्डिंग और डेथ-ओवर्स के विकल्प के बिना उतरना होगा। यह कमी गेंद और बल्ले, दोनों में असर डालती है। इसके बावजूद श्रीलंका के पास स्पिन में माहिश थीक्षाना के रूप में नियंत्रण और पावरप्ले में वैरिएशन है, जबकि तेज गेंदबाजी विभाग गति और हिट-द-डेक लेंथ से नई गेंद पर दबाव बना सकता है। टॉप ऑर्डर में पाथुम निसंका की निरंतरता और बीच के ओवरों में स्ट्राइक रोटेशन श्रीलंका की स्थिरता का आधार हैं।
हसरंगा बाहर, फिर भी श्रीलंका फेवरिट क्यों?
श्रीलंका की ताकत दो हिस्सों में बंटी है—एक, नई गेंद से अनुशासन और मध्य ओवरों में चोकिंग; दूसरा, टॉप-5 में रन बनाने की भरोसेमंद आदत। हरारे की पिच सुबह के सत्र में सीम मूवमेंट देती है और दोपहर बाद स्पिनरों को पकड़ बनती है। ऐसे में श्रीलंका जैसी टीम, जो 10–40 ओवर के बीच रन की रफ्तार थामना जानती है, अक्सर बढ़त ले जाती है। हसरंगा नहीं हैं तो कलाई-स्पिन का X-फैक्टर कम होगा, पर थीक्षाना की सीम-अप फिंगर-स्पिन, कारम बॉल और पावरप्ले में किफायत विपक्ष को बांधे रख सकती है।
बैटिंग में निचले मध्यक्रम की फिनिशिंग श्रीलंका के लिए अहम रहेगी। हसरंगा के बिना लास्ट 10 ओवर में बाउंड्री रेट गिर सकता है, इसलिए टीम मैनेजमेंट संभवतः एक अतिरिक्त बैटर या सीम-बॉलिंग ऑलराउंडर के साथ बैलेंस साधेगा। निसंका की शुरुआत, फिर एंकरिंग—और उसके बाद 35वें ओवर के बाद गियर शिफ्ट—यही रोडमैप दिखता है।
मैदान और मौसम भी कहानी बताते हैं। अगस्त के अंत में हरारे सूखा और ठंडा रहता है, सुबह की हल्की ठंडक नए गेंदबाजों को स्विंग देती है। बाउंड्रीज बहुत बड़ी नहीं हैं, लेकिन हवा चलने पर ऊपर मारना जोखिम बनता है। टॉस जीतने वाली टीम पहले गेंदबाजी की तरफ झुक सकती है, ताकि शुरुआती मदद उठाकर दूसरी पारी में लक्ष्य का पीछा किया जा सके।
जिम्बाब्वे की तैयारी: रज़ा-फैक्टर, टेलर की वापसी और घरेलू बढ़त
जिम्बाब्वे ने 16 सदस्यीय स्क्वॉड घोषित किया है, जिसमें लंबे अंतराल के बाद ब्रेंडन टेलर की वापसी सुर्खियों में है—वह सितंबर 2021 के बाद पहली बार ODI खेलेंगे। टेलर का अनुभव पारी को आकार देता है और ड्रेसिंग रूम में स्थिरता लाता है। शीर्ष क्रम में समय बिताने और स्ट्राइक रोटेशन से वह मध्य ओवरों में स्पिन के दबाव को निष्प्रभावी कर सकते हैं।
सिकंदर रज़ा जिम्बाब्वे की धड़कन बने हुए हैं—मिडिल ऑर्डर में रन, ऑफ-स्पिन से मध्य ओवरों में ब्रेकथ्रू और तेज फील्डिंग—एक ही खिलाड़ी तीन भूमिकाएं निभाता है। रिचर्ड नगारावा और ब्लेसिंग मुजारबानी की जोड़ी नई गेंद से उछाल और लंबाई पर निरंतरता लाती है। मुजारबानी की ऊंचाई और बैक-ऑफ-लेंथ, निसंका जैसे टॉप-ऑर्डर खिलाड़ियों की तकनीक की असली परीक्षा लेगी।
जिम्बाब्वे ने बल्लेबाजी में भी परतें जोड़ी हैं—बेन करन, जोनाथन कैंपबेल और टोनी मुनयोंगा जैसे नाम लाइन-अप को गहराई देते हैं। घर में खेलते हुए जिम्बाब्वे की फील्ड प्लेसमेंट अक्सर आक्रामक रहती है—कवर पर तंग रिंग फील्ड और मिड-ऑन/मिड-ऑफ ऊपर रखकर स्ट्राइक रोटेशन रोका जाता है। यही टेंपो तोड़ने की कोशिश श्रीलंका के एंकर बैटर के खिलाफ दिख सकती है।
इतिहास भी याद दिलाता है कि जिम्बाब्वे उलटफेर कर सकता है। 2017 में उसने श्रीलंका को उसी की धरती पर ODI सीरीज में पछाड़ा था। यानी, अगर शुरुआती 10 ओवर में विकेट जल्दी गिरा दिए तो मैच अचानक बराबरी पर आ जाता है।
Sri Lanka vs Zimbabwe ODI सीरीज का शेड्यूल इस तरह है:
- पहला ODI: 29 अगस्त 2025, हरारे स्पोर्ट्स क्लब
- दूसरा ODI: 31 अगस्त 2025, हरारे स्पोर्ट्स क्लब
खिलाड़ियों पर नजर—यहां मुकाबले बनते और मैच मुड़ते दिखेंगे:
- पाथुम निसंका बनाम ब्लेसिंग मुजारबानी: नई गेंद, टॉप हैंड कंट्रोल और बैक-ऑफ-लेंथ का संघर्ष।
- सिकंदर रज़ा बनाम माहिश थीक्षाना: कारम बॉल और बदलती स्पीड के बीच रज़ा की रेंज-हिटिंग बनाम स्ट्राइक-रोटेशन।
- ब्रेंडन टेलर बनाम श्रीलंकाई पेस: लाइन-लेंथ से टैंपो तोड़ना या अनुभव से गैप ढूंढना—यह टॉप-ऑर्डर की चाबी बनेगा।
रणनीति की बात करें तो श्रीलंका पावरप्ले में 35–40 के अंदर रन रोकने और 10–40 ओवर में 2.5–4 की इकॉनमी लक्ष्य बनाएगा। वहीं जिम्बाब्वे 41–50 ओवर के बीच 80 से ऊपर रन निकालने का ब्लूप्रिंट लेकर उतरेगा, ताकि किफायती स्पिन का असर कम हो। जिम्बाब्वे के लिए न्यूनतम लक्ष्य—कम से कम एक टॉप-3 बैटर से 35 ओवर तक एंकरिंग; श्रीलंका के लिए—पहले 15 ओवर में दो से अधिक विकेट नहीं गंवाने का अनुशासन।
सीरीज का संदर्भ भी अहम है। द्विपक्षीय होने के बावजूद दोनों टीमें इसके तुरंत बाद T20I मोड में जाने वाली हैं, तो यहां से लय, कॉम्बिनेशन और बेंच-स्ट्रेंथ की जांच होगी। रैंकिंग अंक और टूर की मानसिक बढ़त दोनों दांव पर हैं। श्रीलंका चोट प्रबंधन और रोटेशन के साथ लंबा खेल देख रहा है, वहीं जिम्बाब्वे घरेलू स्थितियों में स्क्वॉड की बहुमुखी प्रतिभा आजमाना चाहता है।
आँकड़ों से आगे बढ़कर मैच-क्राफ्ट निर्णायक होगा—टॉस के बाद हालात पढ़ना, दूसरी नई गेंद का इस्तेमाल, और 30वें ओवर के बाद फील्डिंग की तीव्रता। हरारे में छोटे-छोटे फैसले बड़े नतीजे देते हैं—एक अतिरिक्त स्लिप, एक ओवर देर से पावर-हिटर भेजना, या बीच के ओवरों में पार्ट-टाइम स्पिन से साहसी ओवर। यही सूक्ष्मताएं इस सीरीज को दिलचस्प बनाती हैं।
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