जब व्लादिमीर पुतिन, राष्ट्रपति of रूसी संघ, 12 और 13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली पहुंचेंगे, तो यह केवल एक साधारण राजनीतिक दौड़ा नहीं होगा। यह भारत की BRICS अध्यक्षता के दौरान होने वाले ऐतिहासिक BRICS शिखर सम्मेलन 2026नई दिल्ली में उनका व्यक्तिगत उपस्थिति होगी। क्रिमलिन के सलाहकार यूरि उशाकोव ने मंगलवार को इस यात्रा की पुष्टि की है, जिससे कूटनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है।
वास्तव में, यह पिछले एक साल में पुतिन की भारत की दूसरी यात्रा होगी। अक्टूबर 2025 में वे 23वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन में भाग लेने आए थे। अब सितंबर 2026 में उनका वापसी आना इस बात का संकेत है कि दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी न केवल बनी हुई है, बल्कि गहराई भी पा रही है।
कूटनीतिक महत्व और समय की चुनौती
यहाँ बात सिर्फ बैठकों की नहीं है। वर्तमान भू-राजनीतिक तनाव के बीच, जब पश्चिमी देश रूस पर प्रतिबंध लगाए हुए हैं, भारत की स्थिति अद्वितीय है। आज तक और एबीपी लाइव जैसे प्रमुख समाचार स्रोतों ने बताया है कि यह 'हाई-प्रोफाइल' यात्रा BRICS ब्लॉक के बढ़ते सहयोग को दर्शाती है।
नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने 13 जनवरी 2026 को औपचारिक रूप से BRICS की अध्यक्षता संभाली थी। इसके ठीक बाद, 14 जनवरी को विदेश मंत्री डॉ. सुब्रह्मण्यम जयशंकर ने समिट की थीम, लोगो और वेबसाइट का शुभारंभ किया था। अब सितंबर में होने वाला यह 18वां शिखर सम्मेलन उसी दिशा में एक बड़ा कदम है।
ऊर्जा सहयोग और अमेरिकी प्रतिबंध
लेकिन इंतजार करें, कहानी यहीं खत्म नहीं होती। ऊर्जा क्षेत्र में चल रहे बदलाव इस यात्रा को और भी दिलचस्प बनाते हैं। भारत के पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने सोमवार को एक महत्वपूर्ण बयान दिया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका से प्रतिबंधों में ढील न मिलने के बावजूद, भारत ने रूस से तेल खरीदना जारी रखा है।
अजीब बात यह है कि अमेरिका की ओर से भी कुछ राहत की खबरें सामने आई हैं। पहले रिपोर्ट्स में कहा जा रहा था कि अमेरिका ने रूसी तेल खरीद की अनुमति केवल 16-17 मई तक दी थी। लेकिन अब अमेरिका ने इस छूट (waiver) को अतिरिक्त 30 दिनों के लिए बढ़ाने का फैसला किया है। यह निर्णय सीधे तौर पर भारत की ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक लाभों को प्रभावित करता है।
पृष्ठभूमि: 2025 का वह ऐतिहासिक दौरा
याद करें, दिसंबर 2025 में जब पुतिन दो दिन के दौरे पर आए थे, तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी मुलाकात बहुत ही फलदायी रही थी। उस दौरान दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों को 'रणनीतिक साझेदारी' में उन्नत किया था।
- सैन्य और सुरक्षा सहयोग को मजबूत किया गया।
- व्यापार और निवेश के नए रास्ते खोजे गए।
- 'प्रोग्राम 2030' को अपनाया गया, जो 2030 तक आर्थिक सहयोग के रणनीतिक क्षेत्रों को विकसित करने के लिए एक कार्यक्रम है।
उस बैठक में दोनों नेताओं ने संतुलित और स्थायी तरीके से द्विपक्षीय व्यापार बढ़ाने के अपने साझा लक्ष्यों को फिर से पुष्ट किया था। विशेष रूप से उच्च-तकनीकी क्षेत्रों में नई तकनीक और निवेश साझेदारियों पर ध्यान दिया गया था।
भविष्य क्या लेकर आया है?
आगामी BRICS शिखर सम्मेलन केवल एक बैठक नहीं, बल्कि उभरती अर्थव्यवस्थाओं का एक प्रमुख मंच है। इसमें भारत, रूस, चीन, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका सहित अन्य सदस्य देश शामिल होंगे। इस यात्रा से यह स्पष्ट होता है कि भारत अपनी बहु-संपर्क नीति (multi-alignment policy) को कैसे लागू कर रहा है।
विश्लेषकों का मानना है कि इस शिखर सम्मेलन में वैश्विक शासन व्यवस्था में बदलाव और विकास中国家ओं की आवाज को मजबूत करने पर चर्चा होगी। साथ ही, नई दिल्ली में पेट्रोल की कीमतों (₹94.77 प्रति लीटर और ₹87.67 प्रति लीटर के अलग-अलग दरों के साथ) जैसे घरेलू मुद्दे भी अंतरराष्ट्रीय नीतियों से जुड़े हुए हैं।
Frequently Asked Questions
व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा की तारीख क्या है?
व्लादिमीर पुतिन 12 और 13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित BRICS शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए भारत आएंगे। यह यात्रा क्रिमलिन के सलाहकार यूरि उशाकोव द्वारा पुष्टि की गई है।
यह पुतिन की भारत की पहली यात्रा क्यों नहीं है?
यह पिछले एक वर्ष में पुतिन की दूसरी यात्रा है। दिसंबर 2025 में उन्होंने 23वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन में भाग लिया था, जहां उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ कई द्विपक्षीय समझौतों पर हस्ताक्षर किए थे।
अमेरिका के प्रतिबंधों के बावजूद भारत रूस से तेल क्यों खरीद रहा है?
भारत के पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने बताया कि भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक हितों को प्राथमिकता देता है। हालांकि अमेरिका ने हाल ही में रूसी तेल खरीद की छूट को 30 दिनों के लिए बढ़ाया है, लेकिन भारत ने अपनी खरीद नीति में कोई बदलाव नहीं किया है।
BRICS शिखर सम्मेलन 2026 का मुख्य उद्देश्य क्या है?
यह 18वां BRICS शिखर सम्मेलन है, जिसकी मेजबानी भारत कर रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच सहयोग को बढ़ावा देना, वैश्विक शासन व्यवस्था में सुधार करना और आर्थिक, सैन्य और तकनीकी क्षेत्रों में साझेदारी को मजबूत करना है।
'प्रोग्राम 2030' क्या है और इसका भारत-रूस संबंधों से क्या लेना-देना है?
'प्रोग्राम 2030' एक रणनीतिक कार्यक्रम है जिसे दिसंबर 2025 के शिखर सम्मेलन में अपनाया गया था। इसका उद्देश्य 2030 तक भारत और रूस के बीच आर्थिक सहयोग के रणनीतिक क्षेत्रों को विकसित करना, व्यापार बढ़ाना और उच्च-तकनीकी क्षेत्रों में निवेश साझेदारियां बनाना है।
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