मुंबई के दीर्घकालिक स्थानांतरित निवासियों के लिए एक ऐतिहासिक मोड़ आज आया है। दिसंबर 28, 2023 को MHADA के मुंबई बिल्डिंग रिपेयर एंड रिकन्स्ट्रक्शन बोर्ड (MBRRB) ने अपनी पहली कंप्यूटराइज़ड लॉटरी आयोजित की — जिसमें 265 परिवारों को घर दिए गए। यह केवल एक आवंटन नहीं, बल्कि एक दशकों पुरानी अन्याय की भरपाई है। इस लॉटरी में कुल 444 फ्लैट्स उपलब्ध थे, लेकिन जांच के बाद 212 उम्मीदवार पात्र पाए गए। इनमें से 158 ने अपनी स्वीकृति पत्र जमा कर दिए, और उन्हें आवंटन पत्र दिए गए। बाकी 53 की जांच अभी चल रही है।
क्यों यह बड़ी बात है?
यह लॉटरी केवल घर देने का काम नहीं कर रही। यह एक ऐसी प्रणाली की शुरुआत है जिसने अब तक अंधेरे में घुले लोगों को रोशनी दी है। लंबे समय तक ट्रांजिट कैंप में रहने वाले लोगों को घर मिलना बहुत कम होता था — अक्सर दलालों, भ्रष्टाचार या अनिश्चितता के कारण। इस बार, MHADA ने एक स्पष्ट, पारदर्शी और टेक्नोलॉजी-आधारित प्रक्रिया अपनाई। लॉटरी कंप्यूटर द्वारा निकाली गई, कोई हस्तचालित हस्तक्षेप नहीं। यह वही है जो लोग चाहते थे — न्याय, न कि भेंट।
घरों का आकार: एक छोटी सी जीत, बड़ी बात
लॉटरी में चुने गए 265 निवासियों को जो घर मिले, उनका क्षेत्रफल 301 से 753 वर्ग फुट तक था। यह उनके पुराने ट्रांजिट कैंप के 180-200 वर्ग फुट के घरों से लगभग 100 वर्ग फुट अधिक है। इतना अंतर कोई नहीं समझ पाता — लेकिन एक महिला के लिए जो 20 साल तक एक 180 वर्ग फुट के कमरे में रही, यह अंतर जीवन बदल देता है।
पूजा शिरकर एक ऐसी ही व्यक्ति हैं। 2005 में गिरगाँव के कुंभार वाड़ा का इमारत ढह गया था। उनका परिवार बोरीवली के एक ट्रांजिट कैंप में चला गया। वहाँ वे 20 साल तक रहीं — बिना बाथरूम के, बिना सुरक्षा के, बिना भविष्य के। आज, उन्हें 300 वर्ग फुट का घर मिला। उन्होंने कहा — "मैंने अपने बच्चों को इतनी देर तक यह कहकर समझाया कि घर मिल जाएगा। आज लग रहा है, जैसे जीवन फिर से शुरू हो रहा है।"
NOCC शुल्क का छूट: एक बड़ा संकेत
इस लॉटरी का सबसे बड़ा सुपरपावर था — राज्य सामाजिक न्याय और ओबीसी कल्याण मंत्री अतुल सावे द्वारा घोषित एक निर्णय। उन्होंने हर पात्र उम्मीदवार के लिए ₹70,500 के NOC (No Objection Certificate) शुल्क को समाप्त कर दिया। यह शुल्क अक्सर निम्न आय वर्ग के लोगों के लिए अपरिहार्य बाधा बन जाता था।
सावे ने बैंद्रा ईस्ट स्थित MHADA के मुख्यालय में इस घोषणा के साथ 158 आवंटन पत्र वितरित किए। उन्होंने कहा, "हम यह नहीं चाहते कि जो लोग दशकों तक अपने घर खो चुके हैं, उन्हें अब घर पाने के बाद भी उसकी कीमत चुकानी पड़े।"
इसके अलावा, MHADA ने अतिरिक्त 100 वर्ग फुट के लिए भी छूट दी — यानी अगर आपको 300 वर्ग फुट का घर मिला, तो आपको 400 वर्ग फुट तक का घर मिलेगा, और उसकी कीमत सामान्य दरों की जगह छूट दर पर होगी। यह एक ऐसा निर्णय है जो सिर्फ घर देने के बजाय, उस घर को रहने योग्य बनाता है।
क्या होगा अगर आप घर नहीं लेंगे?
लेकिन यह आसान नहीं है। MHADA ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं: आवंटन पत्र पाने के 60 दिन के भीतर आपको अपना घर स्वीकार करना होगा। अगर आप इसे नहीं करेंगे, तो आपका आवंटन रद्द हो जाएगा — और आपका नाम मास्टर लिस्ट से हमेशा के लिए हटा दिया जाएगा। यह एक कठोर नियम है, लेकिन एक आवश्यक। क्योंकि अगर लोग घर पाकर भी उसे नहीं लेंगे, तो वह घर दूसरे के लिए उपलब्ध नहीं होगा।
अगला कदम: 2,000 घरों की लॉटरी
इस लॉटरी का सफल परिणाम अब एक नए योजना के लिए आधार बन गया है। MHADA ने घोषणा की है कि अगले कुछ महीनों में, मुंबई के प्रमुख स्थानों पर 2,000 फ्लैट्स की लॉटरी आयोजित की जाएगी। यह लॉटरी भी इसी पारदर्शी, कंप्यूटराइज़ड और शुल्क-छूट वाली प्रणाली पर आधारित होगी।
इसका मतलब है — जो लोग अब खुश हो रहे हैं, वे अब अकेले नहीं हैं। उनकी कहानी अब एक नई परंपरा बन रही है।
पिछले दशकों का अतीत
मास्टर लिस्ट की शुरुआत 2000 के दशक में हुई थी, जब मुंबई के कई पुराने केस बिल्डिंग्स ढहने लगे। इन इमारतों में रहने वाले लोगों को स्थानांतरित कर दिया गया। लेकिन उन्हें नया घर नहीं मिला। कई बार वे अपने बच्चों के साथ ट्रांजिट कैंप में रहने लगे — जहाँ बिजली और पानी की आपूर्ति अनियमित थी।
एक बार तो एक आवासीय योजना के तहत एक घर देने का वादा किया गया, लेकिन उसके लिए अतिरिक्त शुल्क लगाए गए — जो कि लोगों के लिए असहनीय था। कई लोग इसे चुकाने के बजाय घर छोड़ देने का फैसला कर गए। यही वजह है कि इस बार का निर्णय इतना महत्वपूर्ण है।
विशेषज्ञ क्या कह रहे हैं?
शहरी आवास विशेषज्ञ डॉ. अनुराधा नागर ने कहा — "यह एक रूपांतरण है। यह सिर्फ घर देने की बात नहीं, बल्कि एक ऐसे नागरिक के अधिकार को मान्यता देने की बात है जिसे लंबे समय तक अनदेखा किया गया। अगर यह दृष्टिकोण आगे भी बना रहा, तो मुंबई में आवासीय असमानता का एक बड़ा हिस्सा दूर हो सकता है।"
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या सभी 265 उम्मीदवारों को घर मिल गए हैं?
नहीं। 265 उम्मीदवारों में से 212 की दस्तावेज़ जांच पात्र पाई गई। इनमें से 158 ने अपनी स्वीकृति पत्र जमा कर दिए हैं और उन्हें घर दिए गए। बाकी 53 की जांच अभी चल रही है, और 54 अन्य उम्मीदवारों को अपनी स्वीकृति पत्र जमा करने के लिए आमंत्रित किया गया है।
NOC शुल्क क्यों छूट गया?
NOC शुल्क ₹70,500 होता है, जो अक्सर निम्न आय वर्ग के लोगों के लिए अपरिहार्य बाधा होता है। राज्य मंत्री अतुल सावे ने इसे छूट देकर यह संकेत दिया कि घर देने के बाद भी लोगों को आर्थिक दबाव नहीं देना है। यह नीति एक ऐसे व्यक्ति के अधिकार को मान्यता देती है जिसने दशकों तक अपना घर खो दिया।
अगर मैं घर नहीं लेता, तो क्या होगा?
अगर आप आवंटन पत्र पाने के 60 दिन के भीतर अपना घर स्वीकार नहीं करते, तो आपका आवंटन रद्द हो जाएगा और आपका नाम मास्टर लिस्ट से हमेशा के लिए हटा दिया जाएगा। यह नियम इसलिए है कि घर जिनके लिए बनाए गए हैं, वे उन्हें लें — और बाकी लोगों को भी अवसर मिले।
2,000 फ्लैट्स की लॉटरी कब होगी?
MHADA ने घोषणा की है कि अगले 6-8 महीनों में मुंबई के प्रमुख क्षेत्रों जैसे दक्षिण मुंबई, बांद्रा, थाने और उत्तरी मुंबई में 2,000 फ्लैट्स की लॉटरी आयोजित की जाएगी। यह लॉटरी भी इसी पारदर्शी और शुल्क-छूट वाली प्रणाली पर आधारित होगी।
मास्टर लिस्ट क्या है?
मास्टर लिस्ट 2000 के दशक में शुरू की गई थी, जब मुंबई के पुराने केस बिल्डिंग्स ढहने लगे। इन इमारतों में रहने वाले लोगों को ट्रांजिट कैंप में स्थानांतरित कर दिया गया। लेकिन उन्हें नया घर नहीं मिला। इस लिस्ट में उनके नाम दर्ज किए गए, लेकिन आवंटन की प्रक्रिया अनिश्चित थी। अब यह लिस्ट एक विश्वसनीय आधार बन गई है।
क्या यह लॉटरी सिर्फ मुंबई के लिए है?
हाँ, यह वर्तमान में मुंबई के लिए है, लेकिन यह एक मॉडल है। अगर यह सफल होता है, तो अन्य शहरों जैसे ठाणे, नासिक, पुणे और नागपुर में भी इसी तरह की लॉटरी शुरू की जा सकती है। यह भारत के अन्य शहरों के लिए एक नया आवासीय दृष्टिकोण हो सकता है।
एक टिप्पणी लिखें